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  • फुहार

    June 30, 2020 by

    मौसम की बदलती रुत है,घटाओं का इस ओर रुख है,नन्हीं-नन्हीं जल की बूँदें,छलक रहीं नभ की गागर से। भूमि का आँगन चहका,तरु-पल्लव ख़ुशी से झूमें,पुष्पों की मधुर मुस्कान देख,पुलकित हो मयूर नाँच उठे। नदियाँ, तालाब जीवंत हुए,प्रकृति में है छाई मस्ती,मनभावन शीतल बयार बही,माटी की सौंधी खुशबू महकी। बरखा की रिमझिम फुहार का,स्वागत है प्रफुल्लित… Read more

  • माँ…

    May 11, 2020 by

    इक, कोमल सी अनुभूति होती है,केवल एक शब्द नहीं,सम्पूर्ण वर्णमाला होती है,इक, व्यक्ति ही नहीं,पूरी संस्था होती है,वात्सल्य से परिपूर्ण,ममता की मूरत होती है। धरती पर प्रथम परिचय,माँ से ही तो होता है,तत्परता से हर मोड़ पर,डटकर साथ निभाती है।शिक्षक बन कदम-कदम पर,जीवन का पाठ पढ़ाती है,धूप, छाँव, आँधी-पानी में,सुरक्षा चक्र बन जाती है। विधाता… Read more

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